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पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार
प्रस्तावना
   Soil Profile Study
संपूर्ण विश्व में मरुप्रसार एवं इसके परिणामस्वरूप भूमि का अपक्षीणन (Degradation) एक भयावह समस्या है। पश्चिमोत्तर भारतीय क्षेत्र में यह समस्या मौसम की जटिलताओं कम एवं अनियमित वर्षा (100-400मिमी) तथा उच्च वाष्पोत्सर्जन की दर के कारण और भी विकट है। यहां की मृदा अपरिपक्व,संरचनाहीन तथा स्थूल संरचनायुक्त एवं कमलधारणो तत्वों वाली है।
जल एवं पोषक तत्वों की कमी के कारण क्षेत्र में वनस्पति आवरण एवं उत्पादकता में कमी स्वत: दृष्टिगत होती है। अधिक जनसंख्या दबाव के कारण उपरोक्त समस्या और अधिक भयावह हो जाती है। इससे फसल चक्र तथा भू-उपयोग तरीकों मे भी बदलाव आया है।
उपलब्ध वनस्पति का अतिदोहन तथा लवणीय भूजल द्वारा सिंचाई के परिणामस्वरुप भूमि का अपक्षीणन हुआ है। इसके स्पष्ट प्रमाण  मृदा अपरदन, अपवहन एवं लवणीकरण तथा वृक्ष एवं मृदा विहीन पहाड़ियों के रुप में परिलक्षित हुए हैं। वन पारिस्थितिकी प्रभाग का प्रमुख उद्देश्य मरु प्रसार रोक एवं अवक्रमित पहाड़ियों के पुनर्वास से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर अनुसंधान करना तथा वर्तमान जलवायु परिवर्तन एवं जैवविविधता को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाना है।

   Hetropogon + A. leucophloea ghas jod,
   Sindarli, Pali
उद्देश्य
इस प्रभाग द्वारा मरुप्रसार की समस्या, जलवायु परिवर्तन एवं जैव विविधता से संबंधित निम्न पहलुओं पर कार्य किया जाता है:
वर्षा जल संग्रहण और संरक्षण
मृदा संरक्षण एवं रेतीले टिब्बों का स्थिरीकरण
सिंचाई जल प्रबंधन एवं अवशिष्ट जल का वानिकी में उपयोग
अवक्रमित भूमि का जैव उपचार (Bioremediation)
मृदा जल-पादप संबंध एवं पादपों द्वारा जलाक्रांत क्षेत्र का निस्तारण
जलवायु परिवर्तन एवं कार्बन स्थूलीकरण (Sequestration)
जैव विविधता एवं उत्पादकता
नवीन जानकारी
आफ़री की नई पहल एवं उपलब्धियाँ
संस्थान के प्रकाशनों की सूची (2004 से 2010 तक)
वनो में अर्थव्यवस्था विस्तार पर एक दिवसीय कार्यशाला
शोध परामर्शी समूह बैठक 2011 के कार्यवृत्त
आईएफसी-2011 की कार्यवाही के मुख्य बिन्दु
शुष्क क्षेत्रों में सतत विकास हेतु प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर दिनाक 22nd - 23 rd फरवरी 2012 को SLEM के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम
प्रोफेसर के. वी. गडोव का आफरी दौरा (5 जनवरी से 17 जनवरी 2012)
वन विज्ञान केंद्र, आफरी जोधपुर द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम
भा॰व॰अ॰शि॰प द्वारा नई पुस्तक प्रकाशित "Forestry in the service of Nation: ICFRE Technologies"॰
SLEM के तहत दिनाक 22nd - 23 rd फरवरी 2012 को आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का संक्षिप्त ब्योरा
रोजगार एवं निविदाएं
रिनोवेशन एन्ड एक्सपेन्शन ऑफ टिश्यूकल्चर फेसेलिटि
ईपीएबीएक्स सिस्टम एव वाइरलेस फोन का वर्षिक रखरखाव
विभिन कार्य हेतु कुशल एव अर्द्ध कुशल कामगारों की अपूर्ति
विद्धुत सुविधा का रिपेयर एव रखरखाव
नकारा वाहनों की नीलामी की सूचना
फोटो गैलरी
महानिदेशक का संदेश
निदेशक का संदेश
भा.वा.अ.शि.प संस्थान
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डा.वी.के.बहुगुणा
भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं षिक्षा परिषद् (ICFRE) देश में वानिकी संसाधनों के सतत् प्रबंधन तथा विकास की दिषा में वानिकी अनुसंधान, शिक्षा, व विस्तार के समग्र विकास हेतु निर्धारित ध्येय आधारित कार्यक्रमों का क्रियान्वयन कर रही है।
मुझे शुष्क वन अनुसंधान...
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डॉ. टी. एस. राठौड
शुष्क वन अनुसंधान संस्थान, जोधपुर (राजस्थान) की वेबसाइट पर आपका स्वागत करते हुए मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है।
शुष्क वन अनुसंधान संस्थान की...
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बांस और बेंत के लिए उन्नत अनुसंधान केंद्र, ऑइजॉल
शुष्क वन अनुसंधान संस्थान, जोधपुर
वानिकी अनुसंधान एवं मानव संसाधन विकास केंद्र, छिंदवाड़ा
सामाजिक वानिकी एवं पारि-पुनर्स्थापन केंद्र, इलाहाबाद
वन अनुसंधान केंद्र, हैदराबाद
वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून
हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला
वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयम्बटूर
वन उत्पादकता संस्थान, रांची
काष्ठ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, बंगलूरू
वर्षा वन अनुसंधान संस्थान, जोरहाट
उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर
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