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पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार

प्रस्तावना
शुष्क क्षेत्रीय वनस्पति पर अनुसंधान के उद्देश्य से वर्ष 1992 में अकाष्ठ वनोपज प्रभाग की स्थापना हुई। अकाष्ठ वनोपज को प्राय: गैर-इमारती वनोपज भी कहा जाता है। गैर-इमारती वनोपज के अन्तर्गत सभी तरह के जैविकीय पदार्थ आते हैं जो मानव उपयोग के लिए वनों से प्राप्त होते हैं। वनों से प्राप्त खाद्य पदार्थों में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व: जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा और सूक्ष्म पोषक तत्व (विटामिन और खनिज लवण) इत्यादि होते हैं। इस धारणा को बल मिला है कि ग्रामीण जीवन निर्वाह को उन्नत बनाने, सामुदायिक (community) आवश्यकताओं को पूरा करने, खाद्य पदार्थों की पूर्ति करने तथा पोषण देने, अतिरिक्त रोजगार और आय बढाने, रसायनिक क्रिया आधारित उद्यमों को बढावा देने, विदेशी मुद्रा के अर्जन और पर्यावरणीय जैव-विविधता के संरक्षण उद्देश्यों में अकाष्ठ वनोपज


A. ampliceps on Saline Land
की अहम् भूमिका है। आर्थिक दृष्टि से पशुपालन पर आधारित शुष्क क्षेत्रों में चारा आपूर्ति निर्बाध रूप  से बनी रहनी आवश्यक है। अध्ययन से पता चलता है कि वर्तमान में जहां अन्य वनोत्पादों की कमी हो रही है वहीं वनों से चारा इकट्ठा करना ग्रामीणों के लिए उनका प्रमुख कार्य हो गया है। बढती हुई जनसंख्या के दबाव के मद्देनजर बंजर भूमि/लवणीय क्षार युक्त भूमि तथा अपक्षीण भूमि (degraded land) पर चारा उत्पादन हेतु तकनीक विकसित करने की आवश्यकता है।
अकाष्ठ वनोपज प्रभाग, पादप रसायनों, खाद्य पदार्थों एवं औषधीय पौधों के रासायनिक मूल्यांकन करने, लवणीय क्षार युक्त भूमि के उपयोग हेतु तकनीक विकसित करने, बंजर भूमि में वन चारागाह पध्दति (silvi-pastoral) अपनाकर उसको अधिकाधिक उपयोग में लाने तथा शुष्क क्षेत्रों की वृक्ष एवं झाड़ियों से अधिकाधिक गोंद प्राप्त करने जैसे कार्यों में लगा हुआ है।
Salvadora persica on Saline Land
उद्देश्य
सुधार प्रबंधन तकनीक और पुनर्वनीकरण द्वारा लवणीय क्षार युक्त भूमि पर चारा उत्पादन
औषधीय पादपों के सतत् उपयोग तथा उनकी उपयोगिता को बढाने हेतु पादप रासायनिक मूल्यांकन , जैव विविधता संरक्षण तथा आय अर्जन में बढोतरी।
अकाष्ठ वनोपज की प्राप्ति हेतु शुष्क   क्षेत्रीय  वनस्पति का पता कर चिन्हित करना।
शुष्क क्षेत्रीय वनस्पति से अधिकाधिक गोंद प्राप्त करने की तकनीकें विकसित करना।
नवीन जानकारी
आफ़री की नई पहल एवं उपलब्धियाँ
संस्थान के प्रकाशनों की सूची (2004 से 2010 तक)
वनो में अर्थव्यवस्था विस्तार पर एक दिवसीय कार्यशाला
शोध परामर्शी समूह बैठक 2011 के कार्यवृत्त
आईएफसी-2011 की कार्यवाही के मुख्य बिन्दु
शुष्क क्षेत्रों में सतत विकास हेतु प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर दिनाक 22nd - 23 rd फरवरी 2012 को SLEM के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम
प्रोफेसर के. वी. गडोव का आफरी दौरा (5 जनवरी से 17 जनवरी 2012)
वन विज्ञान केंद्र, आफरी जोधपुर द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम
भा॰व॰अ॰शि॰प द्वारा नई पुस्तक प्रकाशित "Forestry in the service of Nation: ICFRE Technologies"॰
SLEM के तहत दिनाक 22nd - 23 rd फरवरी 2012 को आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का संक्षिप्त ब्योरा
रोजगार एवं निविदाएं
रिनोवेशन एन्ड एक्सपेन्शन ऑफ टिश्यूकल्चर फेसेलिटि
ईपीएबीएक्स सिस्टम एव वाइरलेस फोन का वर्षिक रखरखाव
विभिन कार्य हेतु कुशल एव अर्द्ध कुशल कामगारों की अपूर्ति
विद्धुत सुविधा का रिपेयर एव रखरखाव
नकारा वाहनों की नीलामी की सूचना
फोटो गैलरी
महानिदेशक का संदेश
निदेशक का संदेश
भा.वा.अ.शि.प संस्थान
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डा.वी.के.बहुगुणा
भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं षिक्षा परिषद् (ICFRE) देश में वानिकी संसाधनों के सतत् प्रबंधन तथा विकास की दिषा में वानिकी अनुसंधान, शिक्षा, व विस्तार के समग्र विकास हेतु निर्धारित ध्येय आधारित कार्यक्रमों का क्रियान्वयन कर रही है।
मुझे शुष्क वन अनुसंधान...
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डॉ. टी. एस. राठौड
शुष्क वन अनुसंधान संस्थान, जोधपुर (राजस्थान) की वेबसाइट पर आपका स्वागत करते हुए मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है।
शुष्क वन अनुसंधान संस्थान की...
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बांस और बेंत के लिए उन्नत अनुसंधान केंद्र, ऑइजॉल
शुष्क वन अनुसंधान संस्थान, जोधपुर
वानिकी अनुसंधान एवं मानव संसाधन विकास केंद्र, छिंदवाड़ा
सामाजिक वानिकी एवं पारि-पुनर्स्थापन केंद्र, इलाहाबाद
वन अनुसंधान केंद्र, हैदराबाद
वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून
हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला
वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयम्बटूर
वन उत्पादकता संस्थान, रांची
काष्ठ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, बंगलूरू
वर्षा वन अनुसंधान संस्थान, जोरहाट
उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर
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